*विश्व स्पाइन दिवस पर मेदाज हॉस्पिटल की ओर से एसबीआई में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित*
JNA/नैयर आलम की रिपोर्ट पटना। विश्व स्पाइन दिवस के अवसर पर मेदाज हॉस्पिटल, पटना की ओर से एसबीआई की जजेज कोर्ट रोड स्थित शाखा में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और व्यस्त दिनचर्या में इसे स्वस्थ रखने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी देना था।
कार्यक्रम के दौरान मेदाज हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन, न्यूरोलॉजी विशेषज्ञों और फिजियोथेरेपी टीम ने प्रतिभागियों को सही पोस्चर, रीढ़ की देखभाल, नियमित शारीरिक गतिविधियों और समय पर चिकित्सकीय परामर्श के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। फिजियोथेरेपी सत्र में कार्यालय में बैठकर किए जा सकने वाले आसान व्यायाम और स्ट्रेचिंग के तरीके भी बताए गए, जिन्हें कुछ मिनट निकालकर दैनिक दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।
इस अवसर पर मेदाज हॉस्पिटल के वरिष्ठ कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन डॉ. सौरभ कुमार झा ने रीढ़ की हड्डी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वस्थ रीढ़ शरीर का संतुलन बनाए रखने, दर्द से बचाव करने तथा आसानी से झुकने, मुड़ने और चलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रीढ़ की हड्डी उन नसों की भी सुरक्षा करती है, जो मस्तिष्क और शरीर के अन्य हिस्सों के बीच संकेतों के संचार के लिए आवश्यक हैं।
डॉ. झा ने कहा कि अक्सर लोग रीढ़ की सेहत को तब तक नजरअंदाज करते रहते हैं, जब तक दर्द उनकी दिनचर्या को प्रभावित नहीं करने लगता। रीढ़ के दर्द को नजरअंदाज करना स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसलिए सही पोस्चर अपनाने, नियमित शारीरिक गतिविधियां करने और समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने के प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी सेहत के प्रति जागरूक करना और बचाव संबंधी उपायों को जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।
न्यूरोलॉजिस्ट कंसल्टेंट डॉ. शशि शेखर जायसवाल ने कहा कि रीढ़ की हड्डी शरीर का संतुलन बनाए रखने और दैनिक गतिविधियों को सुचारु रूप से पूरा करने में अहम भूमिका निभाती है। लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने और किसी वस्तु को उठाने के दौरान शरीर की सही स्थिति बनाए रखना जरूरी है। नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाकर रीढ़ से जुड़ी कई समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।
वहीं, डॉ. जेड. आजाद ने कहा कि घर से लेकर कार्यस्थल तक रीढ़ के अनुकूल वातावरण तैयार करना आवश्यक है। रीढ़ की हड्डी से संबंधित किसी गंभीर समस्या के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि रीढ़ की उचित देखभाल, नियमित व्यायाम और संतुलित आहार के माध्यम से हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने में मदद मिलती है, जिससे स्वस्थ और बेहतर जीवन जीने में सहायता मिलती है। मेदाज हॉस्पिटल ने इस जागरूकता कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग देने के लिए एसबीआई के अधिकारियों और कर्मचारियों की पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम के दौरान यह संदेश दिया गया कि छोटी-छोटी स्वस्थ आदतों को अपनाकर रीढ़ की हड्डी की बेहतर देखभाल की जा सकती है। विश्व स्पाइन दिवस का संदेश भी यही है—अपनी रीढ़ को समझें, उसकी सेहत का ध्यान रखें और स्वस्थ भविष्य के लिए सही आदतें अपनाएं।
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रीढ़ के दर्द को नजरअंदाज करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक: डॉ. सौरभ कुमार झा
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