- सहरसा सलखुआ खगड़िया मानसी यूपी दिल्ली सहित देश भर में पत्रकारों पर हो रहे जानलेवा हमले, झूठे मुकदमे, हत्या, अपमान, के खिलाफ लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकार गोलबंद हो–किरण देव यादव
- पत्रकारों को सच्चे अर्थों में अभिव्यक्ति की आजादी एवं पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने व सम्मान देने की जरूरत
- दिल्ली यूपी सहरसा खगड़िया के पत्रकारों के साथ मारपीट गाली गलौज अपमानित करने की घटना की किया घोर निंदा, दोषी पर कार्रवाई करने की किया मांग
अलौली : ऑल इंडिया मिशन प्रेस एसोसिएशन, ऐम्पा एवं देश बचाओ अभियान के संस्थापक अध्यक्ष किरण देव यादव ने सहरसा सलखुआ खगड़िया मानसी दिल्ली यूपी सहित बनाने पूरे देश में पत्रकारों पर हो रहे जानलेवा हमले, फर्जी मुकदमा, हत्या, अपमान की बढ़ रहे घटनाओं की घोर निंदा करते हुए चिंता व्यक्त किया है।
श्री यादव ने कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने एवं सच्चे अर्थों में पत्रकारों को अभिव्यक्ति की आजादी मिले, इसके लिए पत्रकारों को गोलबंद होने की जरूरत है।
श्री यादव ने कहा कि वर्तमान में सहरसा में प्रभात खबर अभिषेक कुमार सहित कई प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों के साथ गाली गलौज, अभद्र व्यवहार, मारपीट, कमरे में बंद करना, तुम्हारा बाप हूं कहना, एवं उलटे झूठे मुकदमे कर देना, सरकारी काम में बाधा डालने, तोड़फोड़ करने, अभद्र व्यवहार करने, आदि प्रशासन एवं सरकार की नियति बन गई है।
विगत दिनों सलखुवा में भी एक पत्रकारों के साथ घटना घटी। खगड़िया एवं मानसी में भी थाना पुलिस प्रशासन के द्वारा सुमलेश कुमार एवं गौतम कुमार बबलू कुमार तथा एक मुखिया के द्वारा भारत की आवाज के पत्रकार मोहम्मद राजू राईन के साथ मारपीट अभद्र व्यवहार घटनाएं घटी। कई पत्रकारों के साथ इस प्रकार की घटना होते रहती है। कई पत्रकार अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए चुप्पी साध लेता है।
लेकिन आवाज उठाने से कतराता है। कई पत्रकार तो सम्मानित प्रतिष्ठित ब्रांडेड अखबारों से होते हैं उनके साथ भी प्रशासन या अन्य लोगों द्वारा प्रताड़ित होते हैं किंतु प्रतिष्ठा वश खामोश हो मुंह में ताला खुद लगा लेते हैं। विगत दिनों सुमलेश कुमार के साथ मानसी थाना में घटना घटी लेकिन हम लोगों ने चुप नहीं बैठा, एसपी से मिला, उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित दरोगा को फटकार लगाये, सस्पेंड करने एवं लाइन हाजिर करने का निर्देश दिया।
अंततः माफी नामा समझौता बाद मामला फिलवक्त दबा हुआ है। क्या पत्रकार इंसान नहीं होता है। आपका समाज का देश का आईना बनकर प्रतिबिंब दिखाते हैं। क्या उन्हें किसी प्रकार का सैलानी सरकार देती है नहीं। वावजूद इसके पत्रकार आपका आवाज बनते हैं। हां यह अलग बातें हैं कुछ एक पत्रकार नहीं बल्कि पत्तलकार होते हैं। कुछ एक पत्रकारों को पीत पत्रकारिता से ऊपर उठकर सच्चे प्रखर निडर निर्भीक स्वतंत्र पारदर्शी पत्रकार बनने की जरूरत है।
श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री गृह मंत्री दिल्ली के मुख्यमंत्री यूपी के मुख्यमंत्री से जब पत्रकार सवाल पूछते हैं तो पुलिस पत्रकारों को बुरी तरह से पिटाई करते हैं जिसका जीता जागता उदाहरण दिल्ली के 4 पीएम के पत्रकार शाहीन खान एवं नफीस खान है। क्या पत्रकारों को सवाल पूछने का अधिकार नहीं है? क्या मुस्लिम देश का नागरिक नहीं है? यह यक्ष प्रश्न पत्रकारों के सामने सुरसा के तरह मुंह फैलाए हुए हैं जिसका जवाब पत्रकारों को ढूंढना होगा अन्यथा इसी तरह से बुरी तरह से पीटोगे। पत्रकार भाइयों बंटोगे तो कटोगे। पेड न्यूज से बचोगे तो सम्मान पाओगे।


